आज हम Fairy Tales In Hindi यानि परियों की कहानी पढ़ेंगे, नन्ही परियों की कहानी हिंदी में। अच्छी अच्छी छोटी परियों की कहानी, प्यारी परियों की कहानी।
आज मैं पांच कहानियां / स्टोरी लेकर आया हूँ, सारी स्टोरी बहुत मज़ेदार और रोमांच से भरी होने वाली हैं। परियों की कहानी बहुत पसंद है, बच्चे और बड़े सभी नयी-नयी परियों की कहानी या फेयरी टेल्स सुन्ना या पढ़ना बहुत पसंद करते हैं। तो बिना देर किये शुरू करते हैं पहली story of fairies in Hindi.
1. ईशा और उसके आँगन की परियां | Fairies Tale
ईशा एक छोटी-सी प्यारी लड़की थी। उसकी आँखों में हमेशा सवाल रहते थे और दिल में ढेर सारी कहानियाँ। उसे सबसे ज़्यादा अच्छा लगता था शाम को अपने घर के पीछे वाले आँगन में बैठना। वहाँ घास नरम थी, एक पुराना अमरूद का पेड़ था और ढेर सारे रंगीन फूल थे।
एक रात, जब चाँद पूरा गोल था और हवा हल्की-सी गुनगुना रही थी, ईशा ने कुछ अजीब देखा।
फूलों के पास…
छोटी-छोटी चमकती रोशनियाँ उड़ रही थीं।
पहले तो ईशा को लगा शायद जुगनू होंगे।
लेकिन ये रोशनियाँ अलग थीं
इनके पंख थे, जैसे काँच के बने हों, और हँसी… बिल्कुल बच्चों जैसी!
ईशा ने धीरे से फुसफुसाकर कहा,
“क…कौन हो तुम?”
तभी एक नन्ही-सी फेयरी उसके सामने आई।
उसकी ड्रेस पंखुड़ियों से बनी थी और बाल चाँदी जैसे चमक रहे थे।
“डरो मत,” फेयरी ने मुस्कुराकर कहा,
“मैं लूना हूँ। ये हमारा छोटा-सा फेयरी वर्ल्ड है।”
ईशा की आँखें खुशी से चमक उठीं
“मतलब… मेरे आँगन में एक जादुई दुनिया है?”
लूना हँसी,
“हाँ! लेकिन सिर्फ वही बच्चे हमें देख सकते हैं जिनका दिल साफ और सपने सच्चे हों।”
लूना ने ईशा का हाथ पकड़ा।
अचानक सब कुछ छोटा होने लगा…
या शायद ईशा खुद छोटी हो गई!
अब वह घास के पत्ते जितनी छोटी थी।
उसके चारों तरफ़ एक अद्भुत दुनिया थी
🍄 मशरूम के घर
🌸 फूलों की सीढ़ियाँ
💧 ओस की बूँदों से बनी झील
और हवा में तैरते हुए गाने
हर फेयरी कुछ न कुछ काम कर रही थी
कोई फूलों में रंग भर रही थी,
कोई तारों की रोशनी जमा कर रही थी,
तो कोई सोते हुए पौधों को लोरी सुना रही थी।
ईशा धीरे से बोली,
“तुम लोग कितने अच्छे हो…”
एक बूढ़ी फेयरी आगे आई।
उसकी आवाज़ बहुत नरम थी।
“हम प्रकृति की रक्षा करते हैं,”
“और बदले में बस प्यार चाहते हैं।”
अगले कई दिनों तक ईशा हर शाम चुपचाप आँगन में आती।
वह फेयरीज़ के लिए पानी रखती,
फूलों को नहीं तोड़ती,
और किसी को भी उस जगह नुकसान नहीं करने देती।
एक दिन उसने उदास लूना को देखा।
“क्या हुआ?” ईशा ने पूछा।
लूना की आँखों में आँसू थे,
“हमारी झील सूख रही है… अगर ऐसा रहा तो हमारा संसार खत्म हो जाएगा।”
ईशा कुछ पल चुप रही।
फिर बोली,
“मैं मदद करूँगी। दोस्त हो न तुम मेरे?”
उसने अपने पापा से कहा कि आँगन में पौधों को रोज़ पानी दिया जाए।
प्लास्टिक फेंकना बंद कर दिया।
बारिश का पानी जमा किया।
धीरे-धीरे झील फिर भर गई
फेयरी वर्ल्ड फिर से चमकने लगा।
एक रात, लूना ने ईशा को गले लगाया।
“तुम हमारी सबसे अच्छी दोस्त हो,”
“लेकिन याद रखना, सब बड़े होकर हमें देख नहीं पाते।”
ईशा की आँखें नम हो गईं।
“तो क्या मैं तुम्हें भूल जाऊँगी?”
लूना मुस्कुराई,
“नहीं… जो दोस्ती दिल से होती है, वो कभी नहीं भूलती।”
अचानक सब रोशनियाँ आसमान में मिल गईं।
ईशा अपने आँगन में थी।
सब सामान्य लग रहा था।
लेकिन…
उसके हाथ में एक चमकती हुई फूल की पंखुड़ी थी
वह मुस्कुराई,
“ये सपना नहीं था।”
उस रात ईशा बहुत सुकून से सोई।
और आँगन में हवा ने धीरे से फुसफुसाया
“धन्यवाद, हमारी दोस्त…”
ये कहानियां पूरी तरह से काल्पनिक हैं, इनका असल जीवन से कोई मतलब नहीं है। ये stories सिर्फ मनोरंजन के लिए कल्पना कर के लिखी गयी हैं। परी जैसी कोई चीज़ असल जीवन में नहीं होती।
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Moral
अच्छा दिल, सच्ची दोस्ती और प्रकृति का ख्याल रखने से
छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़ी खुशियाँ ला सकती हैं।
2. नन्हीं परी और विशाल मगरमच्छ | Pari and Crocodile
बहुत समय पहले की बात है, एक घने जंगल के बीचों-बीच एक सुंदर झील थी। झील का पानी इतना साफ था कि उसमें पेड़-पौधों और आसमान का प्रतिबिंब यानि झलक दिखाई देता था। इस झील के किनारे पर एक नन्ही-सी परी रहती थी, जिसका नाम चमकी था।

चमकी बहुत सुंदर थी, उसके छोटे-छोटे पंख मोर के पंखों की तरह रंग-बिरंगे थे, और जब वह उड़ती थी, तो उसकी परियों की छड़ी से सुनहरी चमक निकलती थी। वह जंगल के सभी जानवरों की मदद करती और हर सुबह फूलों पर बैठकर मीठे गाने गुनगुनाती।
डरावना मगरमच्छ
उसी झील में एक विशाल मगरमच्छ भी रहता था, जिसका नाम भयकर था। उसका शरीर पत्थर की तरह कठोर था, और उसकी लंबी पूंछ जब पानी पर पड़ती, तो लहरें उठ जाती थीं। जंगल के सभी जानवर उससे डरते थे। जब भी वह झील से बाहर आता, पक्षी उड़ जाते, हिरण भाग जाते, और छोटे जानवर छिप जाते।
लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि भयकर के दिल में एक बहुत बड़ा दुख छिपा था। वह अकेला था। उसे अच्छा नहीं लगता था कि सब उससे डरकर भाग जाएँ। वह भी दोस्त बनाना चाहता था, लेकिन उसका डरावना रूप और विशाल आकार सबको उससे दूर रखता था।
एक दिन, चमकी झील के किनारे बैठी थी और रंग-बिरंगे फूलों से बातें कर रही थी। तभी झील से भारी-भरकम आवाज आई-धप्प! भयकर पानी से बाहर आकर किनारे पर लेटा लेकिन उसकी आँखों में आँसू थे।
चमकी को यह देखकर हैरानी हुई। इतना बड़ा मगरमच्छ रो क्यों रहा है? वह धीरे-धीरे उसके पास गई और पूछा, “भयकर, तुम क्यों रो रहे हो?”
भयकर ने एक लंबी सांस ली और धीरे से कहा, “तुम मुझसे नहीं डरती?”
चमकी मुस्कुराई और बोली, “अगर तुमने मुझे कोई नुकसान नहीं पहुँचाया, तो भला मैं तुमसे क्यों डरूँ?”
भयकर ने दुखी मन से कहा, “सब मुझसे डरते हैं, कोई मुझसे बात नहीं करना चाहता, कोई मेरा दोस्त नहीं बनता। मैं बहुत अकेला हूँ।”
चमकी को उसकी बातें सुनकर बहुत अफ़सोस हुआ। उसने कहा, “लेकिन दोस्ती के लिए रूप और शक्ल नहीं, बल्कि दिल का अच्छा होना जरूरी है। क्या तुम सच्चे दिल से दोस्त बनना चाहते हो?”
भयकर ने तुरंत बड़ी मासूमी से सिर हिलाया, “हाँ! मैं बहुत अच्छा दोस्त बन सकता हूँ, लेकिन कोई मुझसे बात ही नहीं करता।”
परी का जादू
चमकी ने सोचा कि वह किस तरह जंगल के बाकी जानवरों को यह समझाए कि भयकर भले ही बड़ा और डरावना दिखता हो, लेकिन वह दिल से बहुत अच्छा है।
उसे एक तरकीब सूझी, उसने अपनी जादुई छड़ी घुमाई और झील के पानी पर एक सुंदर रोशनी फैली। अचानक, पानी में एक जादुई दर्पण (आईना) बन गया, जिसमें जंगल के सभी जानवरों के दिल की बातें दिखाई देने लगीं।
सभी जानवर एक-एक करके वहाँ आए और उस दर्पण में देखा। वहाँ उन्होंने देखा कि भयकर हमेशा छुपकर यह देखता था कि जानवर खुशी-खुशी खेल रहे हैं, और वह भी उनमें शामिल होना चाहता था। मगर जब भी वह उनके पास जाता, वे डरकर भाग जाते।
जानवरों को अपनी गलती का एहसास हुआ। वो समझ गए थे कि भयकर बुरा नहीं है, बस अकेला है।
सच्ची दोस्ती की जीत
अब जंगल के सभी जानवरों ने भयकर से डरना बंद कर दिया। धीरे-धीरे, खरगोश, हिरण, बंदर और पंछियां उसके पास आने लगे। वो उससे बातें करने लगे, उसके साथ खेलने लगे।
अब भयकर झील में अकेला नहीं था। वह जंगल के सभी जानवरों के साथ समय बिताने लगा। चमकी उसकी सबसे अच्छी दोस्त बन गई थी। जब भी कोई नया जानवर डरता, चमकी उसे समझाती कि डर किसी के रूप से नहीं, बल्कि उसके कामों से होना चाहिए।
अब झील के पास हर दिन हँसी-खुशी का माहौल रहता। डर के साए में रहने वाला मगरमच्छ अब जंगल का सबसे प्यारा दोस्त बन चुका था।
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इस नन्हीं परी की स्टोरी से सीख
हमें कभी भी किसी को उसके रूप और आकार से नहीं आंकना चाहिए। सच्ची दोस्ती दिल की अच्छाई पर निर्भर करती है, न कि बाहरी रूप पर।
3. सात परियों की कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक घना जंगल था। उस जंगल के किनारे एक छोटी-सी सुंदर पहाड़ी थी, जहाँ सात परियाँ रहती थीं। ये परियाँ किसी जादू का प्रयोग नहीं करती थीं, बल्कि अपने हुनर और मेहनत से जीवन जीती थीं।

ये सातों परियाँ एक-दूसरे से बहुत अलग थीं, लेकिन सभी मेहनती और दयालु थीं। हर एक के पास एक विशेष कौशल था, जिससे वे जंगल और पहाड़ी के जीवन को सुंदर और सुखद बनाती थीं।
सुहानी – वह सबसे अक़लमंद थी और हर समस्या का हल निकाल लेती थी।
रेशमा – उसे बुनाई और कढ़ाई का बहुत शौक था। वह सुंदर कपड़े और चादरें बनाती थी।
चंपा – उसे बागवानी बहुत पसंद थी। उसके लगाए हुए फूल और पेड़-पौधे जंगल को रंग-बिरंगा बना देते थे।
दीपा – वह अंधेरे में भी रास्ता दिखाने के लिए मशालें और दीपक बनाती थी।
मीरा – उसकी गाने में बड़ी रुचि थी, और उसकी मीठी आवाज़ सुनकर पक्षी तक रुक जाते थे।
किरण – वह मिट्टी के बर्तन बनाने में माहिर थी और सुंदर घड़े, कटोरे और मटके बनाती थी।
रूपा – वह जंगल के जानवरों की देखभाल करती थी और बीमार पक्षियों और जानवरों की सेवा करती थी।
एक दिन, जंगल में एक नन्ही चिड़िया घायल पड़ी थी। उसका एक पंख टूटा हुआ था और वह उड़ नहीं पा रही थी। रूपा ने उसे देखा और तुरंत गोद में उठा लिया। वह उसे अपने घर ले आई और उसकी मरहम-पट्टी की। दीपा ने रात में एक छोटी-सी दीपशिखा जलाई ताकि चिड़िया को डर न लगे।
मीरा हर दिन उसके पास बैठकर धीरे-धीरे गाना गाती, जिससे चिड़िया को सुकून मिलता। चंपा ने उसके लिए छोटे-छोटे बीज इकट्ठा किए, ताकि वह ठीक से खा सके।
धीरे-धीरे चिड़िया स्वस्थ होने लगी। एक दिन, उसने अपने पंख फड़फड़ाए और हल्की-सी उड़ान भरी। सभी परियाँ बहुत खुश हुईं। चिड़िया ने शुक्रिया अदा करने के लिए मीठी तान छेड़ी, मानो वह धन्यवाद कह रही हो।
परियों के लिए मुश्किल की घड़ी
एक दिन अचानक पहाड़ी के पास के गाँव में अकाल पड़ा। बारिश नहीं हो रही थी, और गाँव के लोग भूख से परेशान थे। परियाँ इस दुख को देखकर परेशान हो गईं। वे सबने मिलकर मदद करने का फैसला किया।
चंपा ने गाँव में नए पौधे लगाने के लिए बीज दिए।
दीपा ने गाँव वालों को रात में रोशनी देने के लिए दीपक बनाए।
रेशमा ने पुराने कपड़ों को सिलकर नए कपड़े बना दिए।
मीरा ने अपने मधुर गीतों से लोगों का हौसला बढ़ाया।
किरण ने मिट्टी के बर्तन बनाकर गाँव में पानी जमा करने के लिए दिए।
रूपा ने गाँव के बीमार पशुओं का इलाज किया।
सुहानी ने गाँव वालों को नई फसलें उगाने और बारिश के पानी को इकठ्ठा करने के तरीके बताए।
कुछ महीनों बाद, गाँव के हालात बेहतर हो गए। परियों की मेहनत और गाँव वालों के प्रयास से नई फसलें उग आईं, और तालाबों में पानी भर गया। गाँव के लोग अब खुशहाल जीवन जीने लगे।
सभी ने परियों का धन्यवाद किया और कहा, “आपने हमें यह सिखाया कि मेहनत, प्रेम और समझदारी से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है।”
सातों परियाँ मुस्कुराईं। उन्होंने कोई जादू नहीं किया था, लेकिन अपनी मेहनत और लगन से लोगों की मदद की थी।
सात परियों की कहानी से सीख
उस दिन के बाद, गाँव के लोग भी परियों की तरह मेहनती और आत्मनिर्भर बन गए। वे प्रकृति की देखभाल करने लगे, एक-दूसरे की मदद करने लगे और मुश्किल समय में हार मानने के बजाय समाधान खोजने लगे।
परियाँ अब भी अपनी पहाड़ी पर रहती थीं, लेकिन जब भी किसी को मदद की ज़रूरत होती, वे अपने कौशल से उसकी मदद करने पहुँच जातीं। उनका जीवन यही संदेश देता था – “सच्ची ताकत जादू में नहीं, बल्कि मेहनत, समझदारी और आपसी सहयोग में होती है।”
4. दो जुड़वा परियों की कहानी
बहुत पुरानी बात है, घने जंगल के बीच परी लैंड नाम का एक परियों का नगर था, जिसमें छोटी-छोटी प्यारी परियां रहती थीं। इन परियों में से दो जुड़वाँ बहन पिंक परियां भी रहती थीं, जिनका नाम मीना और टीना था। दोनों बहनें बहुत मेहनती, creative और नरम दिल होने के साथ-साथ बहुत talented भी थीं।

इनकी एक दीप्ति नाम की सहेली थी, जिसके पास एक पुराना सा घर था, जिसमें बारिश होने पर छत से पानी टपकने लगता और घर में पूरा पानी भर जाता। इसके वजह से दीप्ति परेशान रहती थी।
यह सब देखकर एक दिन मीना ने टीना से कहा, “टीना मेरी बहन क्यों न हम दीप्ति के लिए एक नया घर बनाकर उसे गिफ्ट में दें”, टीना ने कहा, “हाँ बहुत अच्छा रहेगा और हम ये घर उसे सरप्राइज करके देंगे”, मीना और टीना दोनों मुस्कुराई।
इसके बाद दोनों परियों ने सबसे पहले एक अच्छी जगह ढूंढी, ऐसी जगह जहाँ अच्छे फूल हों, साफ सुथरा जगह हो। जगह मिलने के बाद दोनों बहनों ने दीप्ति को बताये बगैर अपनी स्किल और मेहनत का इस्तेमाल करके एक खूबसूरत सा घर बना दिया।
अब बारी थी घर को सजाने की, जिसके लिए इन दो परियों ने जंगल में दूर तक जाकर अच्छे-अच्छे, खुशबूदार फूल ले आयी। रौशनी के लिए जुगनुओं को बुला लाया और उनकी मदद से खूबसूरत लाइट बनायीं।
अब दीप्ति को सरप्राइज देनी थी, जिसके लिए दोनों जुड़वा बहनों ने दीप्ति को खेलने के लिए बुलाया। तीनों एक साथ उड़ने का रेस लगाने लगीं। मीना सबसे तेज़ उड़ने वाली परी थी, इसलिए वो सबसे आगे उड़ रही थी। यही इनका प्लान था, यानी मीना सबसे आगे उड़ते हुए नए घर पे पास दीप्ति को ले जाएगी।
अब जैसे ही तीनों नए घर के पास पहुंची, टीना के एक इशारे से जुगनुओं ने अपनी रौशनी से पूरे घर को रोशन कर दिया। यह दृश्य इतना खूबसूरत था कि दीप्ति देखतेही रह गयी। इसके बाद मीना ने उस घर की चाभी गिफ्ट पैक करके दीप्ति को दे दी।
दीप्ति ने चौक कर पूछा, “ये क्या है?”, टीना और मीना दोनों ने एक साथ कहा, “हमारी प्यारी सी सहेली के लिए एक प्यारा सा तोहफा”, इसके बाद दीप्ति ने गिफ्ट को खोल कर देखा तो उसमें से उस नए घर की चाभी निकली।
यह देखकर दीप्ति ख़ुशी से रोने लगी और दोनों सहेलियों को गले से लगा लिया और कहा मेरी जान से भी प्यारी मीना और टीना आज तुम दोनों ने दोस्ती की एक मिसाल क़ायम कर दी है। इसके बाद तीनो सहेलियां घर के अंदर गयीं और मिल कर एक साथ खाना पकाया और खाया।
Moral Of The Story In Hindi
इस story का moral यही है कि हमें मीना और टीना जैसा नरम दिल, मेहनती बनना चाहिए और मीना, टीना दोनों बहनों में जैसी मोहब्बत और एक साथ मिल-जुल कर काम करने की खूबी थी वैसे ही हम भाई बहनों में भी होनी चाहिए।
Fairy Tales In Hindi Language
अगली Fairy Tales In Hindi Language में एक राक्षस भी होने वाला है, बहुत मज़ेदार कहानी होने वाली है।
5. राक्षस और दो हँसमुख परियों की स्टोरी
एक समय की बात है, फेयरी लैंड की रहस्य्मय जगह में, लिली और स्पार्कल नाम की दो हँसमुख परियाँ रहती थीं। जब वो हंसती तब उनकी हंसी पूरे इलाक़े में गूंज उठती, जिससे सारे पौधे और फूल खिल उठते। फेयरी लैंड, बात करने वाली तितलियों, नहीं परियों, पिक्सी डस्ट और मीठी सुगंध वाले फूलों से भरा एक जादुई जगह था।

लेकिन बागीचे के छायादार कोनों में ग्रिज़ल नाम का एक ग़ुस्सैल राक्षस रहता था। ग्रिज़ल क्यूंकि हमेशा ग़ुस्से में रहता था इसलिए उसने लिली और स्पार्कल द्वारा बनाए गए खुशी के माहौल को बेकार समझा। ईर्ष्या और जलन के वजह से राक्षस ने फेयरी लैंड पर काले बादल को लाना शुरू कर दिया, चमकीले फूल मुरझाने और तितलियों ने अपने खूबसूरत रंग खोने शुरू कर दिए।
चीज़ों को ठीक करने के लिए दोनों बहादुर तितलियाँ, लिली और स्पार्कल क्रोधी ग्रिज़ल का सामना करने के लिए उसकी खोज में निकल पड़ीं। अपनी पॉजिटिव सोच और हिम्मत की आँखों में चमक लिए, वे ग़ुस्सैल राक्षस की मांद की ओर उड़ चलीं।
जैसे ही वे ग्रिज़ल के पास पहुंची, उसकी आँखें सिकुड़ गईं और वह गुर्राया और बोला, “तुम मेरे शांतिपूर्ण अंधेरे को क्यों परेशान करने आयी हो?”
लिली ने आंखों में चमक के साथ उत्तर दिया, “प्यारे ग्रिज़ल, हम खुशी और दयालुता फैलाने में विश्वास करते हैं। तुम भी खुश रहा करो, ग़ुस्सा करना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता”, तभी छोटी परी स्पार्कल बोली, “हमें सबके साथ प्यार से रहना चाहिए और हमें खुद से भी प्यार करनी चाहिए। हम जब खुद से प्यार करेंगे तभी तो अपने और अपनों के बारे में अच्छा सोचेंगे। इसीलिए क्यों न हमसब मिलकर फेयरी लैंड को हँसता, खिलता खुशी का जगह बनाएं।”
इसके बाद दोनों परियां बड़ी मासूमी से खिलखिला कर हंसने लगीं, ऐसा होते ही पास के सारे मुरझाये फूल खिल उठे और चारो तरह हरियाली और खुशबू फ़ैल गयी।
ये सब देख कर, ग्रिज़ल ने अपने भीतर एक बदलाव महसूस किया। उसके दिल में ख़ुशी की एक छोटी सी चिंगारी भड़क उठी, जिसने उसकी उदासी और ग़ुस्से को नरम छाया में बदल दिया।
ग्रिज़ल, जो अब परियों की दयालुता से प्रभावित हो कर कबूल किया, “मुझे कभी नहीं पता था कि खुशी का जादू इतना शक्तिशाली हो सकता है। लिली और स्पार्कल, मेरी दुनिया में रोशनी लाने के लिए तुम दोनों का शुक्रिया।”
उस दिन के बाद से, लिली, स्पार्कल और यहां तक कि ग्रिज़ल भी अच्छे दोस्त बन गए, और सब ने मिलकर पूरे जंगल में ख़ुशी लाने की ठानी। जिससे साबित हुआ कि सबसे क्रोधी दिल भी हँसी और दोस्ती के जादू से नरम बन सकता है।
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Moral of the Story in Hindi
Moral Of The Story यह है कि हमें इस राक्षस के जैसा ग़ुस्सा वाला और दूसरे से ईर्ष्या करने वाला नहीं बनना चाहिए। इन दो परियों के तरह खुश मिज़ाज बनना चाहिए और दूसरों को करना चाहिए, तभी हम भी खुश रह सकते हैं।
इसके साथ ही इस परी की कहानी से हमें यह नैतिक शिक्षा / moral education भी मिलती है कि हमें इन छोटी परियों की तरह हमेशा पॉजिटिव यानि सकारात्मक सोच रखनी चाहिए, साथ-ही-साथ हमें परेशानियों को दूर करने के लिए हिम्मत करनी चाहिए और बात करनी चाहिए। ठीक वैसे ही जैसे इन दो परियों ने राक्षस से बात करके उसे अच्छी बातें समझायी।