एक बड़े शहर की भीड़भाड़ भरी गलियों में, जहाँ दिन-रात गाड़ियों का शोर रहता था, वहीं एक पुराने मकान की दीवार के नीचे एक छोटा सा बिल था। उसी बिल में रहता था एक नन्हा सा चूहा – चिंटू।
चिंटू बहुत छोटा था, उसकी आँखें काली-काली और चमकदार थीं। उसका शरीर भी दुबला-पतला था, क्योंकि उसे रोज भरपेट खाना नहीं मिलता था। लेकिन उसके दिल में हिम्मत बहुत थी।
शहर की जिंदगी इंसानों के लिए भले ही आसान हो, लेकिन एक छोटे से चूहे के लिए यह बहुत ही मुश्किल थी। हर दिन उसके लिए एक नई चुनौती लेकर आता था।
सुबह की शुरुआत – भूख के साथ
हर सुबह चिंटू की आँख खुलते ही सबसे पहले उसे अपनी भूख महसूस होती थी। उसका पेट खाली होता और वह सोचता-
“आज कुछ अच्छा खाने को मिल जाए बस…”
वह धीरे से अपने बिल से बाहर झाँकता। पहले इधर-उधर देखता कि कहीं कोई बिल्ली तो नहीं है। फिर धीरे-धीरे बाहर निकलता।
सड़क पर लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती थी। बड़े-बड़े जूते उसके लिए किसी पहाड़ जैसे लगते थे। अगर जरा सी भी गलती हो जाए, तो कोई उसे कुचल भी सकता था।
इसलिए चिंटू बहुत संभलकर चलता था।
चिंटू का सबसे बड़ा काम था-खाना ढूँढना।
वह कभी कूड़ेदान के पास जाता, कभी होटल के पीछे, तो कभी किसी दुकान के कोने में। लेकिन हर जगह उसे खतरा ही खतरा मिलता।
एक दिन वह एक मिठाई की दुकान के पीछे गया। वहाँ उसे जलेबी का एक छोटा सा टुकड़ा दिखा। उसकी आँखें चमक उठीं।
“वाह! आज तो मजा आ जाएगा,” उसने मन ही मन सोचा।
वह धीरे-धीरे उस टुकड़े की ओर बढ़ा ही था कि अचानक अंदर से एक झाड़ू लेकर आदमी आया और जोर से झाड़ू मारने लगा।
चिंटू डर के मारे भागा और एक पाइप के पीछे छिप गया। उसका दिल इतनी तेज धड़क रहा था जैसे अभी बाहर आ जाएगा।
उस दिन भी उसे खाना नहीं मिला।
खतरे हर जगह
चिंटू की जिंदगी में सिर्फ भूख ही नहीं, डर भी बहुत था।
सबसे बड़ा डर था-बिल्ली का।
गली में एक बड़ी काली बिल्ली रहती थी। उसकी आँखें हरी-हरी थीं और वह बहुत चालाक थी। कई बार उसने चिंटू को पकड़ने की कोशिश की थी।
एक दिन तो हालत बहुत खराब हो गई।
चिंटू एक घर के अंदर चुपके से घुस गया था। उसे लगा वहाँ उसे खाने को कुछ मिल जाएगा। लेकिन जैसे ही वह रसोई के पास पहुँचा, उसने देखा-वही काली बिल्ली सामने बैठी है!
दोनों की नजरें मिलीं।
बस फिर क्या था!
चिंटू पूरी ताकत से भागा। कभी मेज के नीचे, कभी कुर्सी के पीछे, कभी दरवाजे की तरफ… और बिल्ली उसके पीछे।
आखिरकार वह एक छोटे से छेद से बाहर निकल गया। बिल्ली वहीं रह गई।
बाहर आकर चिंटू हाँफने लगा।
“आज तो मैं बच गया… थोड़ी सी देर और होती तो…” उसने डरते हुए सोचा।
उस दिन उसने सीखा- हर जगह सुरक्षित नहीं होती।
चिंटू अकेला रहता था। उसके कोई दोस्त नहीं थे।
कभी-कभी रात को जब सब सो जाते, वह अपने बिल में बैठकर सोचता-
“काश मेरा भी कोई दोस्त होता… जिससे मैं बात कर पाता…”
एक दिन उसकी मुलाकात एक और छोटे चूहे से हुई। उसका नाम था गोलू।
दोनों ने साथ में खाना ढूँढने का फैसला किया। अब वे थोड़ा खुश रहने लगे।
एक दिन उन्हें एक दुकान के पीछे बहुत सारे बिस्कुट के टुकड़े मिले। दोनों ने मिलकर खाया।
चिंटू ने पहली बार महसूस किया-
“साथ हो तो मुश्किल भी आसान लगती है।”
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लेकिन जिंदगी हमेशा आसान नहीं रहती
एक दिन जब चिंटू और गोलू साथ में खाना ढूँढ रहे थे, तभी अचानक वही काली बिल्ली आ गई।
इस बार दोनों अलग-अलग दिशाओं में भागे।
चिंटू तो बच गया, लेकिन गोलू को बिल्ली पकड़ ले गई…
चिंटू दूर खड़ा यह सब देख रहा था। उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“मैं कुछ नहीं कर पाया…” वह खुद को दोष देने लगा।
उस दिन के बाद वह फिर अकेला हो गया।
हार नहीं मानी
कई दिन तक चिंटू उदास रहा। वह कम ही बाहर निकलता।
लेकिन एक दिन उसने खुद से कहा-
“अगर मैं ऐसे ही बैठा रहूँगा, तो मैं भी खत्म हो जाऊँगा। मुझे फिर से हिम्मत करनी होगी।”
उसने फिर से बाहर निकलना शुरू किया।
अब वह पहले से ज्यादा समझदार हो गया था। वह जल्दी-जल्दी नहीं भागता था। हर कदम सोच-समझकर रखता था।
फिर एक दिन
एक दिन उसे एक बड़े होटल के पीछे रोटी के कई टुकड़े मिले। उसने धीरे-धीरे उन्हें इकट्ठा किया और अपने बिल में ले गया।
पहली बार उसके पास इतना खाना था कि वह कई दिन आराम से खा सकता था।
लेकिन अभी भी उसके आँखों में ख़ुशी नहीं थी, उसे अपने दोस्त गोलू की याद आ रही थी।
तभी कुछ दूर से एक चूहा लंगड़ता हुआ आता दिखा।
“अरे ये तो गोलू है, अपना गोलू” – चिंटू ने चीखते हुए कहा।
गोलू बिल्ली से जान बचा कर भाग चूका था, लेकिन उसकी एक टांग टूट गयी थी।
गोलू ने चिंटू से कहा “मेहनत बेकार नहीं जाती मेरे दोस्त”।
धीरे-धीरे बदलती जिंदगी
अब चिंटू ने कुछ नई आदतें बना लीं-
- वह दिन में कम और रात में ज्यादा निकलता
- हमेशा पहले खतरे को देखता, फिर आगे बढ़ता
- थोड़ा-थोड़ा खाना जमा करता
अब उसकी जिंदगी थोड़ी बेहतर होने लगी थी।
एक नई उम्मीद
एक रात वह अपने बिल के बाहर बैठा आसमान की ओर देख रहा था। शहर की रोशनी में तारे कम दिखते थे, लेकिन फिर भी वह मुस्कुरा रहा था।
“जिंदगी आसान नहीं है… लेकिन मैं भी हार मानने वाला नहीं हूँ,” उसने खुद से कहा।
अब वह पहले वाला डरा हुआ चूहा नहीं था। वह मजबूत बन चुका था।
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सीख (Moral):
जिंदगी में मुश्किलें हर किसी के पास आती हैं। लेकिन जो इंसान (या छोटा सा चूहा भी) हिम्मत नहीं हारता, वही आगे बढ़ता है।
डर और परेशानी से भागने के बजाय, हमें उनका सामना करना चाहिए।
मेहनत, समझदारी और हिम्मत-इनसे कोई भी मुश्किल छोटी लगने लगती है।