नेचुरा द्वीप के बौने और रहस्य | Bedtime Story in Hindi

समुद्र हमेशा अपनी गहराइयों में कुछ न कुछ छुपाकर रखता है – कभी मोती, कभी मौत, और कभी कोई अनकही कहानी।
यह कहानी है आरव की – बारह साल के एक लड़के की, जिसने अपने पिता के साथ ऐसा द्वीप देखा जहाँ लोग प्रकृति के साथ जीते थे,
पर उस द्वीप में एक भयानक रहस्य भी छुपा था…

एक दिन आरव अपने पापा के साथ एक बड़े जहाज़ पर सफर कर रहा था।
हवा में नमक की खुशबू थी, और लहरें जहाज़ से टकरा रही थीं।
सब कुछ सामान्य था, लेकिन जैसे ही शाम होने लगी मौसम बिगड़ता गया।
आसमान अचानक काला पड़ गया, बिजली चमकी, और समुद्र गरजने लगा।

पापा, डर लग रहा है…
कुछ नहीं होगा बेटा, बस मेरे पास रहो।”

लेकिन कुछ पलों में ही जहाज़ ज़ोरदार आवाज़ के साथ टूट गया।
अफरा तफरी का मौहोल था,
दोनों ने किसी लकड़ी के टुकड़े को पकड़ लिया और लहरों के साथ बहते चले गए।
रात काली थी, और चारों ओर सिर्फ लहरों की गर्जना।

रहस्यमयी द्वीप

सुबह सूरज की रोशनी आँखों पर पड़ी तो आरव ने देखा –
वे एक हरे-भरे द्वीप पर पड़े हैं।
चारों तरफ हरियाली, झरनों की आवाज़ें, और अजीब सी शांति।

लेकिन उस शांति में कुछ था… जैसे कोई उन्हें देख रहा हो।

थोड़ी दूर पेड़ों के बीच से कुछ छोटे-छोटे लोग बौने निकले – तीन फीट ऊँचे,
पर उनके शरीर मजबूत और आँखें चमकदार थीं।
उनके कपड़े पेड़ों की पत्तियों और रेशों से बने थे।

उनमें से एक आगे आया,
“मैं टुरो हूँ, और यह हमारा घर है – नेचुरा द्वीप।”

यूँ तो वो लोग हंस के बात कर रहे थें पर उनके चेहरे से चिंता भी झलक रही थी।
आरव और उसके पापा को उन्होंने अपने गाँव में ले लिया।

बौनों की दुनिया और उनका रहस्य

नेचुरा द्वीप किसी सपनों की जगह जैसा था।
बौने लोग पेड़ों को काटते नहीं थे, बल्कि पेड़ों की डालियों को मोड़कर घर बनाते थे।
रात में वे “जुगनू दीपक” जलाते थे, जिससे पूरा गाँव सोने जैसा चमकता था।

लेकिन आरव ने एक बात नोटिस की –
शाम ढलने के बाद कोई भी गाँव से बाहर नहीं जाता था।
सभी अपने घरों के दरवाज़े बंद कर लेते थे और एक बड़ा अग्निकुंड जलाते थे।

आरव ने टुरो से पूछा,
रात को सब इतने डरते क्यों हैं?”
टुरो ने धीमी आवाज़ में कहा,
क्योंकि इस द्वीप का जंगल रात में जिंदा हो जाता है।”

रात का डर

उस रात आरव नींद में नहीं था। बाहर से अजीब सी आवाज़ें आ रही थीं
जैसे पेड़ हिल नहीं, कराह रहे हों।
अचानक उसने देखा – एक काली परछाई झरने के पास हिल रही थी।
वह बहुत बड़ी थी, इंसान से तीन गुना ऊँची, और उसकी आँखें लाल जल रही थीं।

आरव घबरा गया। उसने पापा को जगाया।
पापा ने खिड़की से झाँका, और दोनों का खून जम गया।
वह कोई जानवर नहीं था… वो था “शैडो बीस्ट”
एक दैत्य जो कभी इस द्वीप का रक्षक था, लेकिन अब श्रापित हो चुका था।

Adventure Island bedtime story in Hindi
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अगले दिन टुरो ने उन्हें सारा सच बताया –
सदियों पहले, नेचुरा द्वीप के बौनों ने प्रकृति से एक वादा किया था:
“हम धरती की रक्षा करेंगे, लेकिन प्रकृति की सीमाओं से कभी बाहर नहीं जाएंगे।”

पर एक लालची आदमी गार्डोस जो तुम्हारी दुनिया से आया था, ने जंगल के दिल में छिपे “नील क्रिस्टल” को निकालने की कोशिश की,
जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया।
वही ऊर्जा अब उस दैत्य शैडो बीस्ट में बदल गई थी,
जो हर रात द्वीप के चारों ओर घूमता, और किसी को भी बाहर निकलने नहीं देता।

हम सब उसके डर में जीते हैं,” टुरो ने कहा, “लेकिन उसे रोकने के लिए हमें फिर वही क्रिस्टल वापस जंगल में रखना होगा।”

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आरव का साहस

अगले दिन रात आई तो आसमान फिर गरज रहा था।
टुरो, आरव और उसके पापा दैत्य में से नील क्रिस्टल निकालने के लिए योजना बनाई।
तीनों ने जुगनुओं से बनी लैंप ली और जंगल में उतर गए।
जंगल में हर कदम पर अजीब फुसफुसाहटें सुनाई दे रही थीं,
जैसे पेड़ खुद उन्हें चेतावनी दे रहे हों।

अचानक, शैडो बीस्ट सामने आ गया –
उसका शरीर धुएँ जैसा, और आँखें आग जैसी लाल।

आरव काँप गया, लेकिन टुरो चिल्लाया,
डरो मत! इसे प्रकाश से डर लगता है!”

आरव ने तुरंत जुगनू दीपक उठाया और उसकी ओर बढ़ा दिया।
दीपक की रोशनी में वह दैत्य पीछे हटने लगा।
देखते ही देखते वहां लाखों जुगनू आ गए जिससे दिन जैसा उजाला हो गया,
अब दैत्य इतनी रौशनी को सह न सका और क्रिस्टल को आरव को सौंप दिया।
पापा ने क्रिस्टल को झरने के नीचे वाले पत्थर में रख दिया –
और तभी द्वीप का पूरा आसमान नीला चमकने लगा।

धीरे-धीरे शैडो बीस्ट गायब हो गया, और उसकी जगह एक चमकता हुआ पेड़ उग आया।

विदाई और वादा

सुबह जब सूरज उगा, तो द्वीप पहले से भी ज़्यादा सुंदर लग रहा था।
बौनों ने आरव और उसके पापा का धन्यवाद किया।
टुरो ने आरव को एक छोटा लकड़ी का हार दिया और कहा,
अब ये द्वीप आज़ाद है, और याद रखना
जहाँ इंसान और प्रकृति साथ रहते हैं, वहाँ कोई दैत्य नहीं रहता
।”

आरव ने मुस्कराकर कहा,
“मैं जहाँ भी रहूँगा, वहाँ धरती को अपना दोस्त बनाऊँगा।”

वे दोनों नाव में सवार हुए।
पीछे से द्वीप की लहरें जैसे उन्हें अलविदा कह रही थीं।

जब आरव और उसके पापा अपने गाँव लौटे, तो सबको उनकी कहानी किसी सपने जैसी लगी।
पर आरव के गले में वो लकड़ी का हार चमक रहा था
और हर रात, जब हवा बहती थी, तो उसमें नेचुरा द्वीप की खुशबू आती थी।

Moral कहानी से सीख

इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि जब हम प्रकृति का सम्मान करते हैं,
तो जीवन में शांति और सुख अपने आप आ जाते हैं।
लेकिन जब हम लालच में आकर प्रकृति को नुकसान पहुँचाते हैं
तो वही प्रकृति हमें चेतावनी देती है – कभी तूफ़ान बनकर, कभी किसी डरावने रूप में।

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आरव ने हमें सिखाया कि साहस सिर्फ डर से लड़ना नहीं होता
बल्कि सही बात के लिए खड़ा होना भी होता है – चाहे वो बात पेड़ बचाने की ही क्यों न हो।
उस छोटे से लड़के ने यह साबित कर दिया कि अगर दिल साफ़ हो और इरादा सच्चा,
तो सबसे अंधेरी रात में भी एक दीपक की रोशनी सब कुछ बदल सकती है।

असल खुशी मशीनों, पैसों या बड़ी-बड़ी चीज़ों में नहीं होती –
बल्कि पेड़ों की छाँव, हवा की खुशबू, और दिल के सुकून में होती है।

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