बहुत समय पहले की बात है।
एक शहर से थोड़ी दूर एक घना जंगल था। जंगल में ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे, जिनकी टहनियाँ आपस में जुड़ी रहती थीं। दिन में यह जंगल सुंदर लगता था, लेकिन रात में वही जंगल डरावना हो जाता था।
उसी जंगल के अंदर, एक छोटी-सी जगह पर, लकड़ी और मिट्टी से बना एक छोटा-सा झोपड़ा था।
उस झोपड़े में रहता था एक बूढ़ा आदमी।
उसकी दाढ़ी सफ़ेद थी, बाल झड़ चुके थे और चेहरे पर झुर्रियाँ थीं।
लेकिन उसकी आँखों में बहुत प्यार और सुकून था।
वह बहुत अच्छा इंसान था।
वह किसी का बुरा नहीं चाहता था।
वह जंगल में अकेला रहता था, लेकिन वह कभी उदास नहीं रहता था।
पेड़, पक्षी, जानवर और हवा की आवाज़ ही उसके दोस्त थे।
एक जिद्दी बच्चे की कहानी
अब कहानी का दूसरा हिस्सा सुनो।
शहर में रहता था एक 10 साल का लड़का, जिसका नाम था रोहन।
रोहन पढ़ने में ठीक था, लेकिन बहुत जिद्दी था।
एक दिन रोहन ने अपने पिता से कहा,
“पापा, मुझे नया मोबाइल चाहिए।”
पिता ने प्यार से समझाया,
“बेटा, अभी तुम्हारी उम्र पढ़ाई की है। मोबाइल बाद में लेंगे।”
लेकिन रोहन को यह बात पसंद नहीं आई।
वह गुस्से में आ गया।
“सबके पास मोबाइल है, बस मेरे पास नहीं!”
“आप मुझे कुछ नहीं देते!”
यह कहकर उसने ज़ोर से दरवाज़ा बंद किया और घर से बाहर निकल गया।
माँ ने आवाज़ लगाई,
“रोहन, बेटा… रुक जाओ!”
लेकिन रोहन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
रोहन गुस्से में चलता गया… चलता गया…
उसे पता ही नहीं चला कि वह कहाँ जा रहा है।
थोड़ी देर बाद उसे एहसास हुआ कि
घर, दुकानें और सड़कें पीछे छूट चुकी हैं।
अब उसके सामने जंगल था।
पहले तो उसे लगा,
“थोड़ा आगे जाकर वापस लौट जाऊँगा।”
लेकिन वह और अंदर चला गया।
धीरे-धीरे शाम हो गई।
आसमान में सूरज डूबने लगा।
चारों तरफ अँधेरा फैलने लगा।
अब जंगल से आवाज़ें आने लगीं-
छर-छर…
हूं… हूं…
हू… हू…
रोहन का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
अब रोहन को बहुत डर लगने लगा।
उसे समझ में आ गया कि उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है।
उसे माँ की बातें याद आने लगीं।
पिता का चेहरा याद आने लगा।
वह ज़मीन पर बैठ गया और रोने लगा।
“मुझे घर जाना है…”
“पापा, मुझे माफ़ कर दो…”
अचानक किसी ने धीरे से कहा,
“बेटा… यहाँ क्या कर रहे हो?”
रोहन डर के मारे काँप गया।
उसके सामने वही बूढ़ा आदमी खड़ा था।
हाथ में लकड़ी की लाठी थी और चेहरे पर चिंता थी।
“डरो मत बेटा,”
बूढ़े ने प्यार से कहा।
“रात हो गई है, जंगल में अकेले रहना ठीक नहीं।”
रोहन ने रोते-रोते सारी बात बता दी।
बूढ़े आदमी की आँखें नम हो गईं।
“चलो मेरे झोपड़े में चलो,” उसने कहा।
लेकिन रोहन बहुत डरा हुआ था।
“नहीं… मैं अंदर नहीं जाऊँगा…”
बूढ़ा आदमी कुछ देर चुप रहा।
फिर उसने कहा,
“ठीक है बेटा, अगर तुम नहीं जाना चाहते,
तो मैं भी बाहर ही रहूँगा।”
और सच में,
वह बूढ़ा पूरी रात झोपड़े के बाहर ही बैठ गया।
उसने आग जलाई।
रोहन आग के पास बैठा।
अगर कोई जानवर आवाज़ करता,
तो बूढ़ा आदमी उठकर देखता।
रात की बातें और सीख
रात बहुत लंबी थी।
बूढ़ा आदमी रोहन से बातें करने लगा-
“बेटा, क्या तुम्हें पता है,
माता-पिता हमारे सबसे अच्छे दोस्त होते हैं?”
रोहन चुपचाप सुनता रहा।
“पिता दिन-रात मेहनत करते हैं।”
“माँ हमें बिना कुछ माँगे प्यार करती है।”
“गुस्से में लिया गया फैसला
हमेशा गलत होता है।”
रोहन की आँखों से आँसू बहने लगे।
“मुझे माफ़ कर दीजिए दादा,”
उसने कहा।
बूढ़ा मुस्कुरा दिया।
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उधर रोहन के पिता बहुत परेशान थे।
वह हर जगह अपने बेटे को ढूँढ रहे थे।
आख़िरकार उन्हें जंगल में आग की रोशनी दिखी।
“रोहन!”
जैसे ही आवाज़ आई,
रोहन दौड़कर पिता से लिपट गया।
“पापा… मुझे माफ़ कर दो…”
पिता ने बूढ़े आदमी का धन्यवाद किया।

घर लौटते समय रोहन ने पिता का हाथ मज़बूती से पकड़ा।
अब मोबाइल से ज़्यादा उसे
प्यार और संस्कार की कीमत समझ में आ गई थी।
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कहानी की सीख (बच्चों के लिए)
• गुस्सा हमें गलत रास्ते पर ले जाता है
• माता-पिता का सम्मान बहुत ज़रूरी है
• हर गलती से सीखना चाहिए