रीमा और आरव की शादी को तीन साल हो चुके थे।
शादी के शुरू के दिन बहुत खूबसूरत थे –
दोनों हर वक्त साथ रहते, साथ खाना खाते, बातें करते, हँसते…
सब कुछ एक सपने जैसा था।
आरव रीमा से बहुत प्यार करता था।
वो हमेशा कोशिश करता कि रीमा को कोई कमी न हो, उसे हर चीज़ मिले।
लेकिन धीरे-धीरे रीमा को लगने लगा कि आरव अब पहले जैसा नहीं रहा।
अगर आरव ऑफिस से देर से आता, तो रीमा सोचती –
“अब तो इसे काम से ही प्यार है।”
अगर आरव थका हुआ चुप रहता, तो वो कहती –
“अब तुम्हें मुझसे बात करने का मन नहीं करता।”
धीरे-धीरे वो हर चीज़ में बुरा देखने लगी।
आरव कुछ भी कहता, तो उसे गलत समझती।
कभी ताना देती, कभी रूठ जाती, कई बार तो झगड़ा काफी ज़्यादा हो जाता।
आरव भी अब बहस कर लेता।
फिर भी वो रीमा से सच्चा प्यार करता था।
हर रात “गुड नाईट” कहता, चाहे रीमा मुँह फेरकर सो जाए।
एक दिन आरव को विदेश में नौकरी का ऑफर मिला।
वो खुश था – सोचा कि इससे रीमा को और अच्छा जीवन दे सकेगा।
पर जब उसने रीमा को बताया, तो वो गुस्सा हो गई
“अब तुम मुझे छोड़कर विदेश जाओगे? यही बाकी रह गया था?”
इस गुस्सा में प्यार छिपा था, पर आरव भी कहीं न कहीं ये सोच रहा था कि
शायद दूरी बढ़ने के बाद हमारा प्यार फिर से ज़िंदा हो जाये।
विदेश जाने का दिन आ गया।
आरव ने प्यार से कहा, “बस दो साल की बात है, फिर वापस आ जाऊँगा।”
रीमा बोली – “जाओ, मुझे तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।”
आरव की आँखों में आँसू थे, लेकिन वो फिर भी बोला –
“फिर भी मैं तुम्हारी फिक्र करता रहूँगा।”
और चला गया।
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शुरू में रीमा को लगा कि सब ठीक है।
वो सोचती थी – “अब तो आज़ादी है, कोई कुछ कहने वाला नहीं।”
लेकिन कुछ महीनों बाद उसे एहसास हुआ कि घर कितना खाली है।
सुबह उठने पर कोई “गुड मॉर्निंग” नहीं कहता,
रात को खाना बनाती तो सामने वाली कुर्सी खाली रहती,
हँसी आती तो हँसने वाला कोई नहीं होता।
धीरे-धीरे उसे महसूस हुआ कि आरव की हर बात में कितना प्यार था –
उसका देर तक काम करना, उसका चुप रहना,
यह सब उसी के लिए था।
अब उसे हर दिन उसका इंतज़ार रहने लगा।
दो साल बाद आरव आया – सिर्फ सात दिनों के लिए।
रीमा उसे देखकर बस चुप रह गई।
कहना चाहती थी – “बहुत याद आई तुम्हारी,”
पर जुबान से बस निकला – “कैसे हो?”
आरव मुस्कुराया “अच्छा हूँ, तुम बताओ?”
वो उसके लिए वही फूल लाया जो रीमा को बहुत पसंद थे – सफेद लिली।
सात दिन ऐसे गुज़रे जैसे सात पल हों।
हर दिन रीमा चाहती थी कि अपने दिल की बात कह दे,
माफ़ी माँग ले, कह दे – “अब समझ गई हूँ तुम्हारा प्यार…”
पर जब भी बोलने जाती, गला भर आता।
सातवें दिन जब आरव जाने लगा, उसने कहा –
“अपना ख्याल रखना रीमा।”
रीमा की आँखों से आँसू बहने लगे।
उसने पहली बार कहा –
“आरव… जल्दी आना, अब तुम्हारे बिना रह नहीं पाती।”
आरव मुस्कुराया, उसकी आँखों में देखा और बोला –
“अब तुम मुस्कुराती रहना… मैं हर बार सिर्फ तुम्हारी मुस्कुराहट के लिए आता हूँ।”
वो चला गया…
और रीमा ने उस दिन पहली बार सच में समझा —
सच्चा प्यार आवाज़ नहीं करता,
वो बस चुपचाप सब कुछ सहता है और फिर भी हमें खुश देखना चाहता है।
अब रीमा हर दिन उसकी याद में जीती है,
उसकी हर बात याद करती है,
क्योंकि अब उसे पता चल गया है –
“कभी-कभी किसी के जाने के बाद ही उसके होने की कीमत समझ आती है।”
रीमा और आरव के दिल में एक दूसरे के लिए प्यार तो है पर अब बहुत दूरी हो चुकी है,
जिसे भरने के उन्हें बात करने की ज़रुरत है
दिल खोल के बात।
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💖 कहानी का संदेश और सीख:
हम अक्सर उन लोगों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं
जो हमारे लिए सबसे ज़्यादा मेहनत करते हैं
और जो हमारी सबसे ज़्यादा फ़िक्र करते हैं।
जो हमें छोड़कर नहीं जा रहे होते,
बल्कि हमारे लिए एक बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश में लगे होते हैं।।
रिश्तों में तकरार हो सकती है, पर भरोसा होना चाहिए।
क्योंकि प्यार का मतलब सिर्फ साथ रहना नहीं,
बल्कि एक-दूसरे को समझना और महसूस करना है।