100+ Short Moral Stories for Childrens in Hindi | नैतिक हिंदी कहानियां

मोरल स्टोरीज़ इन हिंदी बच्चों के अच्छे संस्कार और चरित्र बनाने में बहुत मदद करती हैं। ये कहानियाँ सही और गलत में फर्क समझाने में कारगर होती हैं। शॉर्ट स्टोरीज़ इन हिंदी बच्चों का ध्यान खींचती हैं और उनकी भाषा को बेहतर बनाती हैं। मोरल स्टोरीज़ फॉर चिल्ड्रेन्स इन हिंदी के जरिए बच्चे ईमानदारी, दया और साहस जैसे अच्छे गुण सीखते हैं। एक अच्छी शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी विद मोरल बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डालती है और उन्हें एक अच्छा इंसान बनने की सीख देती है।

ये रहीं अच्छी अच्छी Short Moral Stories for Childrens in Hindi

  1. बोलता बरगद: दोस्ती जो रास्ता बदल दे | Moral Story of Friendship
  2. जंगल की वह रात | Moral Story of Father and Son
  3. जंग और फारस का शेर सलाहदीन | Bedtime Moral Story in Hindi
  4. आख़िरी कॉल: रोंगटे खड़े कर देने वाली Horror Story
  5. पुराना स्वेटर: माँ की यादें | Emotional Story
  6. नन्हें बगुले का बिछड़ना | Story of Bird in Hindi
  7. दिल का रिश्ता – नई शादी | Emotional Story of Mother and Son in Hindi
  8. नेचुरा द्वीप के बौने और रहस्य | Bedtime Story
  9. गरीब गुलाम से राजा | Moral Inspirational Story in Hindi
  10. सर्दी में जंगल के जानवरों की मीटिंग | Winter Animal Story in Hindi
  11. वो सात दिन | दिल को छू लेने वाली Emotional Kahani in Hindi
  12. जंगल वाली खूबसूरत चुड़ैल | Witch Story in Hindi
  13. शादी के बाद पति पत्नी का रिश्ता | Emotional Love Story in Hindi
  14. चिट्ठी जो कभी भेजी नहीं | खामोश प्यार की दास्तान | Emotional Love Story
  15. टाइम ट्रेवल की जादुई हिंदी कहानी
  16. ग़रीब माँ और बेटे की कहानी | Emotional Story in Hindi
  17. भयानक राक्षस और राजा | Monster Hindi Story
  18. जादुई जिन्न की स्टोरी | Jinn Story in Hindi
  19. रहस्य्मयी जंगल का खज़ाना | Kahani in Hindi
  20. UP की भूतिया हवेली | Horror Story
  21. जादुई परियां और राक्षस | Fairies and Monster Tale
  22. अरब व्यापारी और चोर | Thief Story
  23. राजा और आग उगलने वाला ड्रैगन | Dragon Story in Hindi
  24. परियों की मदद | Fairy Story in Hindi
  25. दादी माँ की रात की कहानी | Bedtime Story
  26. जंगल की रहस्य्मयी चुड़ैल | Chudail Ki Story
  27. शेर का परिवार और शिकारी | Animal Story in Hindi
  28. नन्हीं परी की कहानियां | Little Fairy Stories in Hindi
  29. खिड़की वाली नन्हीं चिड़िया | Friend Bird Story
  30. दादी अम्मा, खरगोश का परिवार और दुष्ट शेर | Jungle Ki Kahani
  31. चुड़ैल का महल और खज़ाना | Chudail aur Khazaane Ki Kahani

32. समुंद्री लुटेरे, राक्षस और बहादुर आरव | Pirates Short Story

बहुत समय पहले, नीले-नीले समुंदर के बीच एक छोटा-सा गाँव था – “सागरपुर।” वहीं रहता था आरव, एक सीधा-सादा, लेकिन बहुत जिज्ञासु लड़का। उसे हमेशा समुंदर से अजीब-सा लगाव था। वह घंटों किनारे बैठकर लहरों को निहारता, कभी छोटी नावों के साथ खेलने की कोशिश करता। उसके पिता एक मछुआरे थे और आरव भी उनके साथ जाया करता था।

एक दिन, जब हवा तेज़ चल रही थी और बादल गरज रहे थे, आरव अपने पिता से चुपके से छोटी नाव लेकर दूर निकल गया। उसे देखना था कि समुंदर के बीच क्या है, जहाँ तक कोई नहीं जाता। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था…

लहरों ने अचानक रूप बदल लिया, नाव पलट गई, और जब आरव ने आँखें खोलीं, तो वह खुद को एक बड़ी काली जहाज़ पर पाया।
वहाँ थे समुंदर के लुटेरे – Pirates!
उनकी आँखों में डर और लालच का मिला-जुला रंग था। उनके सरदार का नाम था ब्लेड कप्तान – एक लंबा, कठोर चेहरा वाला आदमी।

अब तू हमारी हिरासत में है, छोटे!” कप्तान ब्लेड ने हँसते हुए कहा।
आरव डर गया, पर बोला, “मुझे बस घर जाना है...”
सारे लुटेरे हँसने लगे – “अब ये जहाज़ ही तेरा घर है!

कैद का सफर और समुंदर का रहस्य

दिन बीतते गए। आरव को ज़बरदस्ती डेक साफ़ करवाया जाता, खाना कम दिया जाता। मगर उसमें एक बात थी – वो हार नहीं मानता था।
वह सबको मदद करता, किसी के ज़ख्म बाँध देता, किसी के लिए पानी लाता। धीरे-धीरे कुछ लुटेरे उसे पसंद करने लगे।

एक रात, समुंदर शांत था – पर अचानक जहाज़ हिलने लगा। पानी में से एक भयानक आवाज़ आई, मानो कोई पहाड़ गरज रहा हो।
सबके चेहरे सफ़ेद पड़ गए – “वो आ गया… समुद्री राक्षस!”

पानी फट गया, और एक विशाल जीव, जिसके दस लंबे टेंटेकल (भुजाएँ) थीं, जहाज़ को पकड़ने लगा। लहरें आसमान छू रही थीं।
सब लुटेरे डरकर भागे, मगर आरव डटा रहा।

वो दौड़कर कप्तान के पास गया, “हमें एक साथ रहना होगा, नहीं तो ये जहाज़ डूब जाएगा!
कप्तान चिल्लाया, “तू क्या जाने लड़ाई?
आरव ने जवाब दिया, “शायद मैं लड़ना नहीं जानता हूँ, लेकिन डर के सामने झुकना भी नहीं जानता!

राक्षस से मुकाबला

आरव ने जल्दी से तेल के ड्रम लाकर राक्षस के मुँह की ओर फेंके, और मशाल से आग लगाई। लपटें उठीं, और राक्षस दर्द से पीछे हट गया।
लेकिन जहाज़ हिल रहा था, लुटेरे गिर रहे थे।
आरव ने चिल्लाकर कहा, “रस्सियाँ पकड़ो! एक-दूसरे को बचाओ!

उसकी आवाज़ में डर नहीं था, बस हिम्मत थी।
लुटेरे भी उसकी बात मानने लगे।
आख़िरकार, सबकी मदद से राक्षस भाग गया – और जहाज़ बच गया।

लुटेरों के दिलों का बदलना

अगले दिन सूरज उगा, और हवा में शांति थी।
कप्तान ब्लेड ने आरव की ओर देखा – “आज अगर तू न होता, तो हम सब मारे जाते।”

उस दिन के बाद से सब आरव को ऐसे मानने लगे जैसे वो उनका कोई सगा हो।

धीरे-धीरे, आरव लुटेरों के बीच नेता जैसा बन गया।
उसने उन्हें समझाया –
लूटकर कुछ पल की खुशी मिलती है, पर दूसरों को बचाकर दिल में सुकून मिलता है।”

वो उन्हें मछली पकड़ना सिखाने लगा, गाँवों में मदद करने ले गया, और एक-एक करके लुटेरे इंसानियत की राह पर आने लगे।

जहाज़ का नाम “Sea Devil” से बदलकर “Sea Guardian” रखा गया।

आखिरी सीन

जब जहाज़ एक दिन सागरपुर के किनारे पहुँचा, तो गाँव वाले हैरान रह गए।
कभी जिनसे सब डरते थे, वही लुटेरे अब गाँव में मदद बाँट रहे थे।

आरव के पिता ने बेटे को गले लगाया, आँखों में आँसू थे –
तू सिर्फ़ मेरा बेटा नहीं, समुंदर का बेटा है, जिसने उसके तूफ़ानों को भी अपना बना लिया।

उस दिन से आरव को सब कहते –
“आरव – समुंदर का मास्टर, जिसने राक्षस को हराया और लुटेरों का दिल जीता।”

Moral of the Story (कहानी से सीख):

सच्ची ताकत तलवार में नहीं होती, बल्कि हिम्मत, अच्छाई और दूसरों की मदद करने की भावना में होती है।
अगर दिल साफ़ हो और नीयत नेक हो, तो इंसान सबसे कठिन हालात में भी लोगों के दिल बदल सकता है।
आरव की तरह, हमें भी डर के सामने झुकने की बजाय, इंसानियत और अच्छाई से काम लेना चाहिए – क्योंकि अच्छाई सबसे बड़ा तूफ़ान भी शांत कर देती है।

33. पिता की बात का मोल

राहुल दस साल का था। पढ़ाई में ठीक-ठाक, लेकिन ज़िद्दी बहुत। उसके पापा, अजय जी, उसे जान से ज़्यादा प्यार करते थे। सुबह से रात तक बस बेटे की ही चिंता-कहीं उसे चोट न लग जाए, कहीं थक न जाए, कुछ भी चाहिए हो तो बिना सोचे पूरा कर देते।
लेकिन राहुल को लगता था कि पापा हर बात में टोकते रहते हैं।
“इतना मत भागो”, “ध्यान से रहो”, “मेरी बात सुनो”-उसे ये सब बोरिंग लगता था।

short moral story of a boy and father
Short moral story of a boy and father

गर्मी की छुट्टियाँ आईं तो राहुल ने एक दिन अचानक कहा,
पापा, मुझे एडवेंचर पर जाना है। किसी ऐसी जगह जहाँ असली मज़ा आए।”
अजय जी मुस्कुरा दिए, “ठीक है बेटा, चलेंगे। लेकिन जहाँ भी जाएँगे, मेरी बात माननी होगी।”
राहुल ने बिना ध्यान दिए हाँ में सिर हिला दिया।

कुछ दिनों बाद दोनों इंडोनेशिया के एक खूबसूरत, लेकिन थोड़ा जंगली, से द्वीप पर पहुँचे। चारों तरफ़ नीला समुद्र, ऊँचे पेड़, अजीब-अजीब पक्षियों की आवाज़ें-राहुल तो खुशी से उछल पड़ा।
पापा, यहाँ तो कमाल है! मैं सब खुद एक्सप्लोर करूँगा।

पापा ने प्यार से कहा, “बेटा, अकेले मत जाना। यह जगह हमारे लिए नई है।”
राहुल को लगा पापा फिर वही रोक-टोक कर रहे हैं। वह बोला,
पापा, आप हमेशा डरते रहते हो। मैं बच्चा नहीं हूँ।”

एक दोपहर, जब पापा टेंट में सामान देख रहे थे, राहुल चुपचाप जंगल की तरफ़ निकल गया। उसे लगा बस थोड़ा घूम कर वापस आ जाएगा। लेकिन जंगल अंदर से बहुत घना था। कुछ दूर जाने के बाद रास्ता ही समझ नहीं आया। मोबाइल नेटवर्क नहीं था।
धीरे-धीरे सूरज ढलने लगा और राहुल का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।

अचानक उसका पैर फिसला और वह एक गड्ढे में जा गिरा। घड़ाम!
चोट तो नहीं लगी, लेकिन डर से आँखों में आँसू आ गए।
पापा…” उसके मुँह से बस यही निकला।

उधर अजय जी को जब राहुल दिखाई नहीं दिया, तो उनका दिल बैठ गया। बिना समय गँवाए वे जंगल की तरफ़ भागे। आवाज़ लगाते रहे-
राहुल… बेटा… आवाज़ दो…”

काफी देर बाद, अँधेरे में, राहुल ने अपने पापा की आवाज़ सुनी। उसने पूरी ताकत से चिल्लाया।
अजय जी दौड़ते हुए पहुँचे और बेटे को सीने से लगा लिया। उनकी आँखों में डर और राहत दोनों थे।
बेटा, ठीक तो हो?” आवाज़ काँप रही थी।

राहुल रोते हुए बोला,
पापा, मुझे माफ कर दो। मैंने आपकी बात नहीं मानी। मुझे बहुत डर लग रहा था।
अजय जी ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा,
“बेटा, पापा की बातें रोकने के लिए नहीं होतीं, बचाने के लिए होती हैं।”

उस रात राहुल बहुत देर तक सोचता रहा। उसे समझ आ गया कि पापा का प्यार सिर्फ़ बोलने में नहीं, हर चिंता में छुपा होता है।
अगले दिन उसने सबके सामने पापा का हाथ पकड़ा और बोला,
पापा, अब मैं आपकी बात हमेशा मानूँगा। आप मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो।

अजय जी की आँखें भर आईं। उन्होंने बेटे को गले लगा लिया।

सीख – Moral of the Story

माँ-बाप की बातें हमें रोकने के लिए नहीं, सही रास्ता दिखाने के लिए होती हैं। जो बच्चा अपने पिता का सम्मान करता है और उनकी बात मानता है, वही सच में समझदार बनता है।

34. रहस्यमयी ग्रह की तलाश

8 साल की हंसमुख और जिज्ञासु बच्ची आर्या को रात में आसमान देखना बहुत पसंद था।
वह रोज छत पर जाकर तारों को देखती और सोचती-
“इन चमकते तारों के पीछे क्या होगा?”

Aliens Planet Short Moral Story in Hindi
Aliens Planet short moral story

उसकी मम्मी डॉ. मीरा कपूर, NASA की एक बहादुर Astronaut थीं।
उनके कमरे में रॉकेट, सूट, और मिशन की तस्वीरें लगी रहती थीं।
आर्या को मम्मी की NASA वाली कहानियाँ बहुत अच्छी लगती थीं।

एक रात आर्या ने पूछा,
“मम्मी, अगर कहीं कोई नया ग्रह है… तो हम उसे ढूंढने जा सकते हैं?”

मीरा ने हंसकर उसके सिर पर हाथ फेरा,
“अगर मेरी बेटी इतना बड़ा सपना देख सकती है,
तो मैं उसे सच करने की कोशिश ज़रूर करूंगी।”

कुछ महीनों बाद NASA ने एक खास मिशन की अनुमति दी-
एक रहस्यमयी ग्रह की खोज का मिशन।

आर्या और मीरा दोनों एक लंबे अंतरिक्ष सफ़र पर निकल पड़ीं।

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🚀 स्पेस में मुश्किलें ही मुश्किलें

स्पेसशिप बहुत बड़ी थी,
उसमें तरह-तरह के बटन, मशीनें और चमकती लाइट थीं।

लेकिन सफ़र आसान नहीं था।

ऑक्सीजन सिस्टम खराब

एक रात अचानक अलार्म बजा।
मशीनें लाल-लाल चमकने लगीं। आर्या डरकर मम्मी को पकड़ ली,
“मम्मी, क्या हम ठीक रहेंगे?”

मीरा ने तुरंत उसे शांत किया,
“जब तक मैं हूँ, कुछ नहीं होगा।”
वह टूल लेकर पाइपों में घुस गईं,
पेंच कसे, तार जोड़े और घंटों बाद मशीन फिर चल पड़ी।
आर्या ने राहत की सांस ली।

खाना कम पड़ गया

कई महीनों बाद फूड पैकेट खराब होने लगे।
मां-बेटी को NASA की इमरजेंसी ड्रिंक से गुज़ारा करना पड़ा।
आर्या कई बार रो देती,
“मम्मी, मुझे घर याद आ रहा है।”

मीरा उसे प्यार से गले लगातीं,
“बस थोड़ा और बेटा… हमारी मंज़िल पास है।”
धीरे-धीरे आर्या 8 साल से 15 साल की हो गई।
और मीरा के बालों में सफेदी आने लगी। लेकिन दोनों ने हिम्मत नहीं छोड़ी।

🪐 आख़िरकार… रहस्यमयी ग्रह दिखाई दिया

एक दिन स्क्रीन पर एक चमकता हुआ हरा ग्रह दिखाई दिया।
उसके आसमान में तीन चांद थे,
और पूरा ग्रह हल्की सुनहरी रोशनी में नहाया हुआ था।
आर्या खुशी से उछली,
“मम्मी, हमने उसे ढूंढ लिया!”

स्पेसशिप धीरे से उसके मैदान पर उतर गई।

जैसे ही वे बाहर निकले,
उनके सामने हरे रंग के, बहुत ताकतवर, लेकिन शांत चेहरे वाले इंसान जैसे जीव खड़े थे।
उनकी आंखें बड़ी-बड़ी और चमकीली थीं।
एक जीव आगे आया और बोला,
“स्वागत है यात्रियों, हम तुम्हें पहचानते हैं।”

आर्या दंग रह गई,
“मम्मी… ये तो हमारी भाषा बोल रहे हैं!”
एलियन मुस्कुराया,
“हम दिमाग से बात समझ लेते हैं, इसलिए हर भाषा समझ लेते हैं।”

एलियंस की दुनिया

एलियन मां-बेटी को अपने शहर ले गए।
जैसे-जैसे वे चलते गए, ग्रह की चीज़ें देखकर आर्या की आंखें चमकती गईं।

एलियंस के घर गोल-गोल, चमकते हुए गुंबद जैसे थे।
रात में ये घर हल्की रोशनी निकालते थे, जैसे चांदनी के छोटे-छोटे गोले हों। उनके ग्रह की हवा बहुत साफ थी। हवा में चलते ही मन को ठंडक मिलती थी। पेड़ हवा के साथ हल्की आवाज़ में गुनगुनाते जैसे कोई लोरी गा रहे हों।

यहाँ की नदियाँ नीली नहीं थीं-
ये हल्की सुनहरी चमक वाली थीं,
जिन्हें देखकर लगता था जैसे पानी में चांद उतरा हो।

  • उनका शरीर बड़ा और मस्कुलर था,
    लेकिन वे बहुत शांत और दयालु थे।
  • वे कभी लड़ते नहीं थे।
  • हर काम मिलकर करते थे-
    खाना, खेती, घर बनाना, सब मिलकर।

उनके बीच किसी का छोटा-बड़ा नहीं था।
सब बराबर थे।
उनमें से एक बूढ़े एलियन ने मीरा से कहा,
“हम एक परिवार की तरह रहते हैं।
हमारी दुनिया हमें एक-दूसरे की मदद करना सिखाती है।”

मीरा ने देखा कि ग्रह थोड़ा ठंडा था।
फिर एलियंस ने बताया-
“हमारा सूरज धीरे-धीरे ठंडा हो रहा है।
अगर ऐसा चलता रहा, तो हमारी रोशनी और खाना दोनों कम पड़ जाएंगे।”

इसी वजह से वे कई सालों से नए लोगों की खोज में थे
जो उनकी मदद कर सकें।
वे बोले,
“हमें लगा कि तुम, एक NASA वैज्ञानिक,
हमें बचाने में मदद कर सकती हो।”

मीरा ने उनकी तरफ देखा।
आर्या ने मम्मी का हाथ पकड़कर मुस्कुराते हुए कहा,
“मम्मी, हम इनकी मदद करेंगे ना?”

मीरा ने सिर हिलाकर कहा,
“ज़रूर, बेटा। इसी के लिए तो हम आए हैं।”

एलियंस की आंखों में खुशी चमक उठी।

मोरल (सीख)

सपने बड़े हों या छोटे,
अगर दिल साफ हो, इरादा मजबूत हो
और साथ में प्यार और हिम्मत हो-
तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।

35. हाथी और उसकी साइकिल | Elephant Story In Hindi

जंगल के बीच एक बहुत बड़ा हाथी रहता था, जिसका नाम मोंटी था। मोंटी बहुत सीधा-सादा और मेहनती था। वह अपने दोस्तों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता था। लेकिन उसकी एक अजीब सी इच्छा थी, उसे साइकिल चलाने का बहुत शौक था.

Short Moral Hindi Stories for Kids
Short Moral Hindi Stories for Kids

एक दिन, मोंटी ने जंगल के बाजार में एक चमकदार लाल रंग की साइकिल देखी। उसे देखते ही उसका मन मचल उठा। लेकिन साइकिल वाले ने हंसते हुए कहा, “अरे मोंटी भाई! यह साइकिल तुम्हारे लिए नहीं बनी। तुम तो बहुत भारी हो, यह साइकिल तुम्हारा वजन नहीं सह पाएगी!”

मोंटी को यह सुनकर बहुत दुख हुआ, और वह खूब व्यायाम यानि Exercise करने लगा ताकि वह दुबला हो जाए। पर भला ऐसा कैसे होता, वो तो एक हाथी था। लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने ठान लिया कि वह अपनी खुद की साइकिल बनाएगा, जो उसकी ताकत को सहन कर सके।

मोंटी ने पास के नदी किनारे से मजबूत लकड़ियाँ इकट्ठी कीं। फिर लोहार भालू की मदद से लोहे के पहिये बनवाए। खरगोश कारीगर ने बैठने के लिए एक आरामदायक सीट बनाई। तोते ने उसे रंग-बिरंगी पेंटिंग करके सजाया। कुछ ही दिनों में मोंटी की खुद की एक मजबूत साइकिल तैयार हो गई!

मोंटी की साइकिल बनाने में उसके दोस्त भालू, खरगोश, और तोते ने मदद की थी।

जब मोंटी पहली बार अपनी साइकिल पर चढ़ा, तो पूरे जंगल के जानवर देखने के लिए इकट्ठा हो गए। कुछ उसकी हिम्मत की तारीफ कर रहे थे, तो कुछ मज़ाक उड़ा रहे थे। मगर मोंटी बिना किसी की परवाह किए पैडल मारने लगा। पहले तो साइकिल डगमगाई, लेकिन थोड़ी ही देर में मोंटी ने साइकिल चलाना सीख लिया.

अहंकार और सीख

अब मोंटी जंगल में अपनी साइकिल चलाकर घूमने लगा। वह इतना खुश था कि धीरे-धीरे उसमें थोड़ा घमंड आ गया। वह दूसरों से कहने लगा, “देखो, मैं जंगल का सबसे अनोखा हाथी हूँ! तुम सब पैदल चलते हो, लेकिन मैं साइकिल पर घूमता हूँ!”

एक दिन, वो अपनी साइकिल लेकर नदी किनारे गया। वहां खरगोश, बंदर और हिरण पानी पी रहे थे। मोंटी ने ठहाका मारते हुए कहा, “अरे, तुम सब अब भी पैदल चलते हो? साइकिल चलाने का असली मजा तो मुझसे पूछो!”

मोंटी यह कहते-कहते भूल गया कि आगे रास्ता पतला था। अचानक उसकी साइकिल फिसली, और वह सीधे नदी में जा गिरा, जंगल के सभी जानवर हंसने लगे। मोंटी को अपनी गलती का एहसास हुआ।
वह झेंपते हुए बोला, “मुझे समझ आ गया कि सिर्फ कुछ नया सीखने से कोई महान नहीं बनता, बल्कि हमें दूसरों का सम्मान भी करना चाहिए।”

मोंटी ने अपने दोस्तों से माफी मांगी और उन्हें भी साइकिल चलाना सिखाने लगा। अब वह फिर से सभी का प्रिय बन गया। जंगल के जानवरों ने मिलकर और भी कई मजबूत साइकिलें बनाईं और अब पूरा जंगल साइकिल चलाने लगा!

इस हिंदी कहानी से सीख:

कभी भी अहंकार (घमंड) नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल (Skill) को दूसरों की भलाई के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

35. खोया खज़ाना | Moral Story for Children

हरे-भरे जंगल में जहाँ ऊँचे-ऊँचे पेड़ आसमान से बातें करते थे, वहीं एक छोटा लड़का रमेश अपने पंखों वाले दोस्त, नीलू तोते के साथ एक रोमांचक सफर पर निकला था। ये कोई आम सफर नहीं थी, बल्कि एक गुप्त खजाने की खोज की थी, जिसके बारे में रमेश के दादा ने उसे बताया था।

khoya khazana Hindi kahani
खोया खज़ाना कहानी हिंदी में

रमेश को अपने दादा की पुरानी किताबों में एक पीला पड़ा कागज़ मिला, जिस पर एक रहस्यमयी नक्शा बना था। नक़्शे में जंगल के अंदर स्थित एक गुफा का जिक्र था, जहाँ राजा विक्रम का छुपा हुआ खजाना था।
नीलू बहुत बुद्धिमान और बातें करने वाला तोता था। उसने रमेश से कहा, “हमें सावधान रहना होगा, जंगल में कई रहस्य छुपे हैं।”

रमेश और नीलू ने जंगल में कदम रखा। चारों तरफ घनी हरियाली थी, पक्षियों की मधुर चहचहाहट गूँज रही थी। लेकिन जैसे-जैसे वे आगे बढ़े, रास्ता मुश्किल होता गया। अचानक वे दलदली जमीन पर आ पहुँचे। “रमेश, संभल कर!” नीलू ने चेतावनी दी।
रमेश ने एक लंबी टहनी ली और सावधानी से जमीन पर रखते हुए आगे बढ़ा। किसी तरह वे उस दलदल को पार कर गए।

आगे बढ़ते हुए वे एक पुराने मंदिर के खंडहर में पहुँचे, जहाँ चारों ओर लताओं ने सब कुछ ढँक दिया था। रमेश ने देखा कि नक़्शे के मुताबिक, उन्हें एक पत्थर की दीवार के पास जाना था, लेकिन वहाँ पहुँचते ही दीवार के पीछे से एक ज़ोरदार दहाड़ सुनाई दी।

अचानक, एक बड़ा शेर उनके सामने आ गया। रमेश के हाथ-पैर कांपने लगे। नीलू झट से रमेश के कंधे पर बैठा और बोला, “डरने की जरूरत नहीं, मैं इसे इसका ध्यान भटकाता हूँ।”
नीलू शेर के चारों ओर उड़ने लगा, जिससे शेर का ध्यान बट जाये। तभी रमेश ने अपनी जेब से एक गुड़ की डली निकाली और शेर के सामने फेंकी। शेर ने उसे चखा और धीरे-धीरे जंगल में चला गया।

रमेश और नीलू आगे बढ़े और आखिर उस रहस्यमयी गुफा के गेट तक पहुँच गए। गुफा के अंदर अंधेरा था, लेकिन रमेश के पास एक टॉर्च थी। जैसे ही उन्होंने अंदर कदम रखा, वहाँ कई चमगादड़ उड़ने लगे। गुफा के अंदर एक बड़ा पत्थर रखा था, जिस पर कुछ अजीब निशान थे। नीलू ने उन निशानों को ध्यान से देखा और कहा, “रमेश, यह राजा विक्रम की निशानी है।”

रमेश ने ध्यान से नक्शा देखा और पत्थर को धीरे-धीरे धकेला। अचानक, एक गुप्त द्वार खुल गया! अंदर एक बड़ा रूम था, जिसमें सोने की मूर्तियाँ, चाँदी के सिक्के और कीमती रत्न चमक रहे थे। रमेश की आँखें खुशी से चमक उठीं।

रमेश ने खजाने में से कुछ सिक्के और ज़ेवर अपनी छोटी थैली में रखे और फिर गुफा से बाहर निकल आया। उसने तय किया कि इस खजाने को गाँव के भले के लिए उपयोग करेगा।

जब वे गाँव लौटे, तो रमेश ने यह खजाना अपने दादा को दिखाया। दादा जी मुस्कराए और बोले, “सच्ची दौलत सिर्फ सोना-चाँदी नहीं होती, बल्कि हिम्मत और सच्चे दोस्त भी अनमोल खजाने होते हैं।”

नीलू खुशी-खुशी बोला, “तो क्या अब हमारे लिए कोई और रोमांचक सफर है?”

रमेश हँसा और बोला, “बिलकुल, अगला सफर जल्द ही!”

और इस तरह, रमेश और नीलू की यह रोमांचक सफर खत्म हुई, लेकिन नए रोमांचों की उम्मीद के साथ!

36. बैंगन और छोटी लड़की | Story of Brinjal in Hindi

एक छोटे से गाँव में राधा नाम की एक प्यारी सी लड़की रहती थी। वो बहुत चंचल, हंसमुख और अक़लमंद थी। उसकी माँ एक किसान थी, जो अपने खेतों में तरह-तरह की सब्जियाँ उगाती थी। खेतों में टमाटर, गोभी, मिर्च, लौकी और बैंगन की भरपूर फसल होती थी। लेकिन राधा को बैंगन बिल्कुल पसंद नहीं था।

Story of Brinjal in Hindi
Story of Brinjal in Hindi

राधा की माँ जब भी बैंगन की सब्जी बनाती, वो नाक-मुँह चढ़ाने लगती और खाने से मना कर देती। वो कहती, “माँ, ये बैंगन तो अजीब सा होता है। मुझे यह सब्जी बिल्कुल अच्छी नहीं लगती।” उसकी माँ उसे समझाने की बहुत कोशिश करती, लेकिन राधा की जिद के आगे वो हार जाती।

एक दिन राधा अपनी माँ के साथ खेत में गई। वहाँ उसने देखा कि बैंगन के पौधों में सुंदर बैंगनी रंग के बैंगन लटक रहे हैं। अचानक, उसे ऐसा लगा जैसे एक बैंगन उससे कुछ कह रहा हो।

राधा ने चौंककर इधर-उधर देखा, फिर ध्यान से सुना। हाँ, सचमुच एक बैंगन उससे बात कर रहा था!

“राधा! तुम मुझे पसंद क्यों नहीं करती?” बैंगन ने दुखी आवाज़ में पूछा।

राधा अचरज में पड़ गई। उसने हँसते हुए कहा, “अरे! सब्जियाँ भी बोलती हैं? लेकिन बैंगन भैया, सच कहूँ तो तुम मुझे स्वाद में अच्छे नहीं लगते।”

बैंगन ने आह भरते हुए कहा, “राधा, क्या तुम जानती हो कि मैं कितना फायदेमंद हूँ? मेरे अंदर बहुत सारे पोषक तत्व होते हैं। मैं सेहत के लिए बहुत अच्छा हूँ। फिर भी तुम मुझे नापसंद करती हो?”

राधा ने सिर हिलाया और बोली, “पर मैं तो सिर्फ आलू, गोभी और मटर ही खाना पसंद करती हूँ।”

बैंगन का जादू

बैंगन मुस्कुराया और बोला, “अगर मैं तुम्हें अपनी दुनिया दिखाऊँ, तो क्या तुम मेरी बात सुनोगी?”

राधा को बैगन की ये बात मज़ेदार लगी, उसने झट से हाँ कर दी। तभी जादू हुआ, अचानक राधा खुद को एक अनोखी दुनिया में पाई। वो बैंगनों के एक बड़े बाग में थी, जहाँ हर जगह सुंदर बैंगन उगे हुए थे।

फिर, एक बूढ़ा बैंगन सामने आया और बोला, “राधा, यह हमारी दुनिया है। हम सिर्फ तुम्हारे खाने के लिए नहीं उगते, बल्कि तुम्हारी सेहत का भी ध्यान रखते हैं। हमें खाने से शरीर में खून बढ़ता है, ताकत मिलती है, और बीमारियाँ दूर रहती हैं। अगर तुम हमें नहीं खाओगी, तो हमारी मेहनत बेकार चली जाएगी।”

राधा चुप हो गई। उसने कभी इस बारे में नहीं सोचा था।

तभी, उसने देखा कि बगीचे में कुछ बच्चे बीमार बैठे हैं। जब बैंगन की सब्जी उन्हें खिलाई गई, तो वे धीरे-धीरे ठीक होने लगे।

अब राधा को समझ में आने लगा कि बैंगन कितना उपयोगी है। वो बोली, “मुझे माफ़ कर दो, बैंगन भैया! मैं आज से तुम्हें ज़रूर खाऊँगी।”

जैसे ही उसने यह कहा, वो वापस खेत में आ गई।

घर पहुँचकर राधा ने माँ से कहा, “माँ, आज से मैं बैंगन की सब्जी खुशी-खुशी खाऊँगी!”

माँ यह सुनकर हैरान रह गई और खुशी से मुस्कुरा दी। उस दिन राधा ने स्वाद लेकर बैंगन की सब्जी खाई और उसे बहुत पसंद भी आई।

अब वो अपने दोस्तों को भी बैंगन के फायदे बताने लगी। धीरे-धीरे गाँव के कई बच्चे, जो बैंगन नहीं खाते थे, उन्होंने भी इसे खाना शुरू कर दिया।

कहानी से शिक्षा:

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हर फल और सब्जी हमारे लिए फायदेमंद होती है। हमें बिना सोचे-समझे किसी भी चीज़ को नापसंद नहीं करना चाहिए, बल्कि उसके महत्व को समझना चाहिए।

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि बच्चों को बिना चिल्लाए अनुशासन कैसे सिखाएँ? तो इस Parenting Tips को ज़रूर पढ़ें।

37. गाँव की गुड़िया और दादी का प्यार | Dadi Ki Kahani

छोटे से गाँव बालापुर में एक दस साल की लड़की रहती थी, जिसका नाम था गुड़िया। वो बहुत ही चंचल, हँसमुख और समझदार थी। गाँव की मिट्टी में खेलना, तालाब में कागज़ की नाव तैराना और आम के पेड़ पर चढ़ना उसे बहुत पसंद था। लेकिन उससे भी ज़्यादा उसे अपनी दादी से कहानियाँ सुनना अच्छा लगता था। उसकी दादी, मंगला देवी, बहुत समझदार और दयालु महिला थीं।

Dadi Ki Kahani in Hindi
Dadi Ki Kahani in Hindi

गुड़िया के माता-पिता शहर में काम करते थे, इसलिए वो अपनी दादी के साथ गाँव में ही रहती थी। दादी ने ही उसे अच्छे संस्कार, सच्चाई और मेहनत का महत्व सिखाया था। हर रात जब आसमान में तारे टिमटिमाते और गाँव में शांति छा जाती, तब दादी गुड़िया को अपनी गोद में बैठाकर कहानियाँ सुनातीं।

एक दिन गाँव में एक व्यापारी आया, जो तरह-तरह की सुंदर चीजें बेच रहा था, चमकती हुई चूड़ियाँ, रंग-बिरंगी साड़ियाँ, खिलौने और मिठाइयाँ। गुड़िया भी वहाँ पहुँची और उसकी नज़र मोतियों के सुंदर हार पर पड़ी। वो हार देखकर मंत्रमुग्ध हो गई।

दादी, मुझे यह हार चाहिए!” गुड़िया ने जिद की।

दादी ने प्यार से समझाया, “बेटा, यह हार बहुत महंगा है। इसे खरीदने के लिए बहुत सारे पैसे चाहिए।”

गुड़िया को यह बात अच्छी नहीं लगी। उसने सोचा, काश मेरे पास ढेर सारे पैसे होते! उसी दिन उसने मन में ठान लिया कि वो बहुत पैसे कमाएगी और फिर जितनी चीजें चाहेगी, खरीद लेगी।

लालच का फल

अगले दिन गुड़िया ने गाँव में घूम-घूमकर छोटे बच्चों को कहानियाँ सुनानी शुरू कर दी और बदले में उनसे कुछ पैसे लेने लगी। धीरे-धीरे उसने काफी पैसे इकट्ठे कर लिए। लेकिन अब उसकी पैसों की भूख बढ़ गई।

फिर उसने गाँव की गलियों में फूल बेचना शुरू कर दिया। कुछ दिनों में उसके पास अच्छे पैसे इकट्ठा हो गए। अब वो रोज़ सोने से पहले अपने पैसे गिनती और खुश होती। पर धीरे-धीरे उसने महसूस किया कि उसकी कहानियाँ सुनने वाले बच्चे कम होते जा रहे थे, उसके दोस्त उससे दूर हो रहे थे, और उसकी दादी भी उससे कम बात करने लगीं थीं।

गुड़िया इस बदलाव से दुखी थी, पर उसे कारण समझ में नहीं आ रहा था।

सबक की सीख

एक दिन दादी ने गुड़िया को बुलाया और प्यार से पूछा, “बेटा, क्या तुम खुश हो?

गुड़िया ने सिर झुका लिया। वो महसूस कर रही थी कि पैसे तो उसके पास थे, लेकिन अब वो पहले जैसी खुश नहीं थी।

दादी ने उसे एक कहानी सुनाई—”एक बार एक किसान के पास बहुत धन था, लेकिन वो इतना लालची था कि अपना समय सिर्फ़ धन इकट्ठा करने में लगाता था। उसने अपने परिवार, दोस्तों और गाँव वालों से दूरी बना ली। धीरे-धीरे, उसका धन तो बढ़ता गया, लेकिन जब वो बीमार पड़ा, तो उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। तब उसे एहसास हुआ कि असली धन प्यार और अपनापन होता है, न कि सिर्फ़ पैसे।”

गुड़िया को अब सब समझ में आ गया था। उसने अपने सारे पैसे उठाए और गाँव के जरूरतमंद बच्चों को बाँट दिए। अब वो फिर से खुश थी, उसके दोस्त वापस आ गए, और सबसे बढ़कर, उसकी दादी ने उसे गले से लगा लिया।

अगर आप भी कहानियां लिखकर पैसे कमाना चाहते हैं तो इस पोस्ट “स्टोरी लिखकर पैसे कैसे कमाएं” को पढ़ें।

इस स्टोरी से नैतिक शिक्षा

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि पैसे से खुशी नहीं खरीदी जा सकती। असली खुशी हमारे अपनों के साथ समय बिताने, प्यार बाँटने और दूसरों की मदद करने में है।

38. ज़हरीला सांप और खूबसूरत मुर्गा | Moral Story of Cock

एक गाँव में एक खूबसूरत, ताकतवर मुर्गा रहता था। वो रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले बांग देता, जिससे पूरा गाँव जाग जाता। गाँववाले उससे बहुत प्यार करते थे।

Moral Story of a Cock and a Snake in Hindi
Moral Story of a Cock and a Snake in Hindi

उसी गाँव के पास एक घना जंगल था, जहाँ एक चालाक और क्रूर साँप रहता था। वो अक्सर गाँव के छोटे जीवों का शिकार करता और मौका मिलने पर अंडे भी खा जाता।

एक दिन साँप ने सोचा, यह मुर्गा बहुत घमंडी है। हर सुबह जोर से बांग देकर सबको जगा देता है। अगर मैं इसे हरा दूँ, तो पूरा गाँव मुझसे डरने लगेगा.”

साँप ने मुर्गे को चुनौती दी, “अगर तुम मुझसे जीत गए, तो मैं इस गाँव को हमेशा के लिए छोड़ दूँगा। लेकिन अगर मैं जीत गया, तो तुम्हें मेरा दास यानि नौकर बनकर रहना होगा.”

मुर्गे ने बड़ी बहादुरी से कहा, “चालाकी से नहीं, हिम्मत से जीत हासिल होती है। मैं तैयार हूँ.”

अब ठीक जैसे पहलवानों की कुश्ती होती है, वैसी ही कुश्ती मुर्गे और सांप के बीच हुई। साँप फुर्तीला और ज़हरीला था, लेकिन मुर्गा अक़लमंद था। उसने जल्दी ही साँप की चालों को समझ लिया।
जैसे ही साँप उस पर झपटा, मुर्गे ने जोर से अपने पंजों से जमीन पर वार किया, जिससे धूल उड़ गई और साँप की आँखों में चली गई।

साँप कुछ पल के लिए अंधा हो गया, और उसी मौके का फायदा उठाकर मुर्गे ने अपनी तेज़ चोंच से साँप के सिर पर वार कर दिया। दर्द से कराहता हुआ साँप ज़मीन पर गिर पड़ा।

साँप ने अपनी हार मान ली और बोला, “तुम मुझसे ज्यादा चतुर और साहसी हो। मैं यह गाँव छोड़कर जा रहा हूँ और कभी वापस नहीं आऊँगा।”

मुर्गे की जीत पर गाँव के लोग बहुत खुश हुए और उसकी बहादुरी की तारीफ़ करने लगे। अब वह न सिर्फ गाँव का पहरेदार था, बल्कि उसकी अकलमंदी की भी मिसाल दी जाने लगी।

शिक्षा:

समझदारी और हिम्मत से बड़ी से बड़ी मुसीबत को हराया जा सकता है।

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